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Harsh Madhukar

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मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं | Harsh Madhukar

ये सब किसकी माया है
हर तरफ बस तू छाया है
तू मन, काया, दिल में समाया है
बस तेरी ही झलक हर – इक में देखता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

बस तुम्हे होने मे ही मैं हूं
तुमसे ही ये चलती सांसे
सोचने भर से ही खिलती है बांछे
जीवन ही तुम हो,जीवन में तुम हो
बस स्वप्न देखता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

वो धीमी हंसी, वो भोलापन
वो कोमल हृदय, वो बचपन
मन की प्यारी छवि पूजता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

वो मीठी बोली जैसे कन्हैया की मुरली
बजते मृदंग जैसे बरसाने की होली
श्यामपट पर लिखे स्वेत लकीरों के रंग देखता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

ये हर रंग तेरा, तू है रंगोली
केवट के सहारे राम देखता हूं
मैं जिधर देखता हूं तुम्हे देखता हूं
देखते ही देखते तुम्हे सोचता हूं
है कोई ये साया,प्रभु के द्वारे
समुंदर में कभी आंसू ढूंढता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं
ये सब किसकी माया है
हर तरफ बस तू छाया है
तू मन, काया, दिल में समाया है
बस तेरी ही झलक हर – इक में देखता हूं
में हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

बस तुम्हारे होने मे ही मैं हूं
तुमसे ही ये चलती सांसे
सोचने भर से ही खिलती है बांछे
जीवन ही तुम हो,जीवन में तुम हो
बस स्वप्न देखता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

वो धीमी हंसी, वो भोलापन
वो कोमल हृदय, वो बचपन
मन की प्यारी छवि पूजता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

वो मीठी बोली जैसे कन्हैया की मुरली
बजते मृदंग जैसे बरसाने की होली
श्यामपट पर लिखे स्वेत लकीरों के रंग देखता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं

ये हर रंग तेरा, तू है रंगोली
केवट के सहारे राम देखता हूं
मैं जिधर देखता हूं तुम्हे देखता हूं
देखते ही देखते तुम्हे सोचता हूं
है कोई ये साया,प्रभु के द्वारे
समुंदर में कभी आंसू ढूंढता हूं
मैं हर जगह बस तुम्हे देखता हूं |

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